Industries Department

उद्यमियों हेतु उपयोगी योजनाऐं एवं कार्यक्रम

 

राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजनाः-

जिले में स्थापित होने वाले नये विनिर्माण एवं सेवा सम्बन्धी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के नये उपक्रम तथा विस्तार / विविधिकरण/ आधुनिकीकरण पर विनियोजन के लिए स्टाम्प ड्यूटी में 50 प्रतिशत छूट, भू संपरविर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, विद्युत शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, भू कर में 50 प्रतिशत छूट, मंडी कर में 50 प्रतिशत छूट, विलासिता कर में 100 प्रतिशत छूट तथा 30 प्रतिशत निवेश अनुदान व 20 प्रतिशत रोजगार अनुदान प्रदान किया जा रहा है।      

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

राजस्थान एमएसएमई विकास सहायता योजना, 2008 -

योजना के तहत विद्युत कर में छूट, आई एस ओ/पेटेन्ट लेने पर अनुदान, ईटीपी स्थापना पर अनुदान तथा टेड मार्क व परीक्षण शाला की स्थापना पर अनुदान का प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कर में 75 प्रतिशत छूट उपलब्ध है।

 

खाद्य प्रसंस्करण सम्बन्धी उद्यम स्थापना, खाद्य प्रसंस्करण श्रृंखला एवं टेस्टिंग लेब तथा उद्यमियता प्रशिक्षण हेतु अनुदान-

जिले में स्थापित होने वाले खाद्य प्रसंस्करण के सम्बंधी उद्योगों के तकनीकी भवन तथा प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत  अधिकतम 50 लाख रूपये का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। 

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

 

टेन टू गेन योजना-

उद्योगों में क्वालिटी मेन पावर तैयार किये जाने की दृष्टि से युवाओं को प्रशिक्षण पर रखने एवं उसके बाद न्यूनतम 50 प्रतिशत युवाओं को उसी प्रतिष्ठान में स्थाई नियुक्ति दिये जाने पर 3 से 12 माह की प्रशिक्षणकाल के दौरान दिये जाने वाले स्टाईफंड का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 2000 रूपये प्रतिमाह का भुगतान किया जावेगा। 

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

राजस्थान उद्यम एकल खिडकी सामर्थ्यकारी एवं अनुज्ञापन अधिनियम, 2011 के माध्यम से विभिन्न राजकीय विभागों/ निगमों की स्वीकुतियां/एन.ओ.सी. दिलवाना-

राज्य सरकार द्वारा नये उद्यमों की स्थापना से पूर्व विभिन्न राजकीय विभागों तथा रीको, जयपुर विद्युत वितरण निगम लि., फैक्ट्री एवं बायलर्स, वाणिज्य कर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, नगर परिषद/नगर पालिका, पर्यटन, कृषि एवं श्रम से वंाछित पंजीयन/स्वीकृतियां/एन.ओ.सी. दिलाये जाने की दृष्टि से राजस्थान उद्यम एकल खिडकी सामर्थ्यकारी एवं अनुज्ञापन अधिनियम, 2011 प्रारम्भ की गई है। जिले में 10 करोड रूपये से कम निवेश के प्रस्ताव जिला उद्योग केन्द्र एवं 10 करोड से अधिक के प्रस्ताव निवेश संवर्धन ब्यूरो, जयपुर द्वारा की जाती है।

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.bipraj.raj.nic.in

 

उद्यमियों हेतु राज्य फैसिलीटेशन काउसिंल-

लघु उद्यमों द्वारा विभिन्न स्थानों एवं व्यक्तियों को सप्लाई किये गये माल के भुगतान की प्राप्ति न होने की स्थिति में सहायता करने की दृष्टि से राज्य फैसिलीटेशन काउसिंल का गठन आयुक्त उद्योग की अध्यक्षता में किया गया है। 

 

उद्यमी ज्ञापन पार्ट प्रथम व द्वितीय की अभिस्वीकृति जारी करना-

नये उद्यम स्थापना के इच्छुक उद्यमियों द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अधिनियम, 2006 के तहत उद्यमी ज्ञापन अभिस्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया जाना चाहिये। उक्त ज्ञापन में उद्यमी द्वारा प्रस्तावित प्रोजेक्ट से संबंधित सभी सूचना शामिल की जाती है। उक्त संसूचना के आधार पर ही विभिन्न विभागों द्वारा विनिर्माण अथवा सेवा उद्यम के रूप में सुविधाऐं उपलब्ध करवाई जाती हैं। उपरोक्त उद्योग में वाणिज्यिक सेवा प्रारम्भ करने के पश्चात् उद्यमी ज्ञापन द्वितीय की अभिस्वीकृति जारी की जाती है।

 

जिला स्तरीय औद्यौगिक समिति की बैठकें आयोजित करना-

विभिन्न औद्यौगिक क्षेत्रों में औद्यौगिक विकास से जुडे हुए विभिन्न विभागों/निगमों से संबंधित समस्याओं पर विचार विमर्श हेतु जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय औद्यौगिक समिति की बैठक आयोजित की जाती है। इस बैठक में औद्यौगिक विकास हेतु भविष्य में वंाछित संसाधनों पर भी चर्चा कर राज्य सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किये जाते हैं।

 

 

निर्यातक उद्यमियों हेतु योजनाऐं

विदेशी प्रदर्शनियों में भाग लेने पर अनुदान-

राज्य के निर्यातक उद्यमियों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शियों में भाग लेने पर अधिकतम 3 प्रदर्शनियों पर प्रतिवर्ष प्रति प्रदर्शनी 75000 रू. का अनुदान प्रदान किया जाता है। 

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

निर्यातक अवार्ड-

राज्य के उद्यमियों द्वारा विदेशों में उत्कृष्ट उत्पादों के निर्यात पर राज्य स्तरीय निर्यात पुरस्कार अलग अलग श्रेणियों में प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। 

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

 

हस्तशिल्पियों की सहायता हेतु योजनाऐंः- 

हस्तशिल्पियों हेतु बाजार सहायता योजना-

उक्त योजना के तहत हस्तशिल्पियों को राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय एवं स्थानीय मेलों एवं प्रदर्शनियों में माल की मार्केटिंग करने हेतु भाग लेने पर अनुदान, स्टाल रेन्ट पर 50 प्रतिशत एवं 250 रू. प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता दिये जाने की प्रावधान है। किसी हस्तशिल्पी अथवा बुनकर द्वारा एक वर्ष में अधिकतम 5 प्रदर्शनियों  हेतु उक्त लाभ लिया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

आर्टीजन परिचय पत्र-

हस्तशिल्पियों को सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) भारत सरकार द्वारा परिचय पत्र बनवाये जाते हैं।

 

हस्तशिल्पियों हेतु जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय पुरस्कार योजना-

 जिले के उत्कृष्ट हस्तशिल्पियों हेतु जिला स्तरीय पुरस्कार प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है तथा इन्हीं में से राज्य स्तरीय पुरस्कार राजसिको द्वारा दिये जाने का प्रावधान है।

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajsico. in

 

चर्म प्रशिक्षण कार्यक्रमः-  

अनुसूचित जाति के युवाओं को लेदर फुटवीयर में प्रशिक्षण दिया जाता है।

 

राजस्थान चर्म शिल्प विकास एवं आधुनिकीकरण योजना, 2013-

उक्त योजना के तहत चर्म दस्तकारों को शू लास्ट एवं चर्म सिलाई मशीन तैयार किये जाने हेतु बैंक से ऋण लेने पर क्रय की लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम 15,000 रू. का) अनुदान स्वीकृत किया जाता है।

 

 

शिक्षित बेरोजगार युवाओं/महिलाओं हेतु स्वरोजगार योजनाऐं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमः-

 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रमः-

इसके अंतर्गत नयी इकाई लगाने के लिये विनिर्माण क्षेत्र मे 25.00 लाख एवं सेवा क्षेत्र में 10 लाख तक का ऋण का प्रावधान है। इसमें स्वयं का योगदान 10 प्रतिशत रहता है। ग्रामीण क्षेत्र में इकाई लगाने पर सामान्य श्रेणी के उद्यमी को 25 प्रतिशत एवं एस0सी0, एस0टी0 एवं ओ0बी0सी एवं महिला उद्यमी होने पर 35 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। शहरी क्षेत्र में इकाई लगाने पर सामान्य श्रेणी के उद्यमी को 15 प्रतिशत एवं एस0सी0, एस0टी0 एवं ओ0बी0सी एवं महिला उद्यमी होने पर 25 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। 

आधिक जानकारी के लिए जाएँ- www.kvic.regppmegp.in

 

नए उद्यम हेतु राजकीय योजनाओं, उपलब्ध संसाधनों व अवसरों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करनाः-

जिले में नये उद्यम स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को उद्यम स्थापना के संबंध में उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। मार्गदर्शन के तहत जिले में वर्तमान औद्यौगिक स्थिति, उपलब्ध संसाधन, विभिन्न राजकीय योजनाओं के तहत उपलब्ध छूट एवं अनुदान आदि से अवगत कराया जाता है।

 

विभिन्न स्थानों, संस्थाओं व वर्गों में औद्यौगिक प्रोत्साहन शिविर आयोजित करनाः

शिक्षित युवाओं व समाज के अन्य व्यक्तियों को नये उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित करने के साथ सभी विभागों द्वारा अपनी योजनाओं व सुविधाओं से अवगत कराया जाता है।

 

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमः-

युवाओं को नये व्यवसाय एवं उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित करने की दृष्टि से दो सप्ताह का उद्यमियता प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। जिसमें युवाओं को प्रेरित करने के साथ विभिन्न विभागों के नियमों की जानकारी प्रदान की जाती है तथा व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

 

तकनीकी उद्यमियता/दक्षता उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रमः-

युवाओं के स्वयं का उद्यम स्थापना की दृष्टि से अथवा प्रशिक्षणोपरांत रोजगार दिये जाने की दृष्टि से तकनीकी उद्यमियता एवं क्षेत्र के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम दो माह की अवधि के लिए आयोजित किये जाते हैं। प्रशिक्षण की समाप्ति पर प्रशिक्षणार्थियों को टूलकिट प्रदान कर रोजगार हेतु तैयार किया जाता है।

 

गृह उद्योग योजनान्तर्गत प्रशिक्षणः-

 महिलाओं को स्वयं का उद्यम  स्थापना की दृष्टि से तीन माह का गृह उद्योग योजनान्तर्गत प्रषिक्षण दिया जाता है ताकि वे अत्यंत छोटे उपक्रम स्वयं के स्थापित  कर सकें। योजनान्तर्गत गरीब, विधवा, परित्यक्तता तथा अल्पसंख्यक महिलाओं को घरेलू उद्योगों (आरातारी,सिलाई,कडाई,बैग निर्माण,सोफ्ट टॉयज) का निःषुल्क प्रषिक्षण दिया जाता है।

 

मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना 2013-

राज सरकार द्वारा स्वयं का उद्यम, सेवा एवं व्यवसाय स्थापित करने पर तकनीकी रूप से सक्षम अभ्यार्थीयों को 10 लाख रू तक का ऋण प्रदान कराने के लिये जिला उद्योग केन्द्रों के माध्यम से योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 8 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। 

अधिक जानकारी के लिए जाएँ - www.rajind.rajasthan.gov.in

 

 

उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों हेतु योजनाऐं/कार्यक्रमः-

 

भागीदारी फर्म पंजीयनः-

भागीदारी अधिनियम 1932 रजिस्ट्रार ऑफ फर्मस इसके अंतर्गत धारा 60 से लेकर 67 तक की अधिकार इस कार्यालय को शेष धाराओं में मुख्यालय (जयपुर) स्तर से कार्यवाही की जाती है। दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी फर्म/ संस्थान में भागीदार होते हैं, तो उसका पंजीयन रजिस्ट्रार ऑफ फर्म। साथ ही किसी फर्म में कोई भागीदार रिटायर्ड या जुडना भी इसी कार्यालय से किया जाता है।

 

बांट एवं माप अधिनियम तथा पैकेज कामोडिटी रूल्स के तहत लाइसेंस  देना तथा अभियोग दर्ज करनाः-  

विधिक माप विज्ञान  अधिनियम 2009 के अंतर्गत बांट व माप उपयोगकर्ता के बाट व माप का सत्यापन प्रतिवर्ष, लोहे के बांट व पीतल के बाट का सत्यापन प्रति दो वर्ष बाद किया जाता है। इनके उल्लंघन किये जाने पर विभिन्न धाराओं में एक्ट मंे अभियोग दर्ज कर कम्पाउडिंग करने का अधिकारी सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान को है।विधिक माप विज्ञान पी0सी0आर0 एक्ट 2011 इसके अंतर्गत कोई भी इकाई   अपने उत्पाद को अगर पैकिंग करके विक्रय करती है तो उसे इसके अंतर्गत पंजीयन कराना होगा और धाराओं की पालना करनी होगी तथा उपभोक्ता से अंकित मूल्य से अधिक राशि वसूल करने पर इनके उल्लंघन किये जाने पर विभिन्न धाराओं में एक्ट मंे अभियोग दर्ज कर कम्पाउडिंग करने का अधिकारी सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान को है।

 

इलेक्ट्रिकल एप्लाइसेंस कन्ट्रोल आर्डर के तहत कार्यवाहीः-

 आई.एस.आई. मार्का युक्त विद्युत उपकरणों के इस्तेमाल को बढावा देने तथा संरक्षण देने हेतु इलेक्ट्रिकल एप्लाइसेंस कन्ट्रोल आर्डर के तहत निरीक्षण एवं अभियोग दर्ज किये जाते हैं।

 

 

एमएसएमई विकास संस्थान द्वारा प्रदत्त सहायता एवं सुविधाऐंः-

 

साख आधारित पूूॅजी अनुदानः-

 योजना के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों द्वारा उन्न्त तकनीक के उद्यम स्थापना पर मशीनरी की अधिकतम एक करोड की लागत का 15 प्रतिशत पूॅजी अनुदान प्रदान किया जाता हैं।

 

अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने पर अनुदानः-  

सूक्ष्म, लघु उद्यमियों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मेलों/ प्रदर्शनियों में भाग लेने पर हवाई किराये का 75 प्रतिशत तथा स्थान के किराये का 50 प्रतिशत पुनर्भरण किया जाता है। महिला/अ.जा./अ.ज.जा. उद्यमियों को हवाई किराये एवं स्थान किराये का 100 प्रतिशत पुनर्भरण किया जाता है।

 

बार कोड लेने पर अनुदानः-

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों द्वारा इकाईयों के उत्पाद हेतु बार कोड लेने पर पंजीयन फीस का 75 प्रतिशत पुनर्भरण किया जाता है।

 

केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों द्वारा क्रयः-

केन्द्र सरकार के मंत्रालय/विभाग/ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने कुल क्रय का कम से कम 20 प्रतिशत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से खरीदेंगे।

 

परीक्षण सुविधाऐंः-

उद्योगांे में उपयोग किये  जा रहे कच्चे माल एवं तैयार माल के गुणवत्ता परीक्षण की सुविधा मामूली शुल्क पर उद्यमियों को प्रदान की जाती है।

 

आईएसओ पुनर्भरणः-  

लघु उद्यमियों द्वारा आईएसओ प्रमाण पत्र लिये जाने पर कुल व्यय का 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम 75000रू. में से जो भी कम राशि हो, पुनर्भरण की जाती है।

 

क्रेडिट गारन्टी योजनाः-

इस योजना के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यम इकाईयों को 50 लाख रूपये की सीमा तक कोलेट्रल फ्री ऋण दिया जाता है।

 

महिलाओं के लिए ट्रेड योजनाः-

योजना के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु प्रशिक्षण एवं सूचना, उत्पादन एवं सेवा सम्बन्धी परामर्श देते हुए ऋण मुहैया कराया जाता है।

 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें-

महाप्रबंधक,जिला उद्योग केन्‍द्र

कलेक्‍ट्रेट कैम्‍पस, धौलपुर

संपर्क- 05642 220866

वेबसाईट - http://industries.rajasthan.gov.in